आज का सच
सीमा स्मृति ये सिलसिला खौफ के घने साए बढ़ते चले जाएँ, माँ- बेटी -बहू हर दिल पे छाएँ काश ऐसा हो जाए। वो नाजो पली…
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सीमा स्मृति ये सिलसिला खौफ के घने साए बढ़ते चले जाएँ, माँ- बेटी -बहू हर दिल पे छाएँ काश ऐसा हो जाए। वो नाजो पली…
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क्या फर्क पड़ता है आघात-प्रतिघात से जब दर्द का एहसास शून्य पड़ जाता है। यथार्थ तड़पता है— महज शब्दों के जाल में किसी रक्तहीन दिल…
रचना पढ़ें : ‘शून्य एहसास’
संघर्ष’ अन्धकार से लड़ने की परिभाषा से दूर, रोशनी से आवरित उस भीड में, जिसकी चकाचौंध में मिचमिचाने लगी है आंखे, धुंधलाने लगे है रास्ते,…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
पढ लेते हैं ‘कलमा’ सभी कौन पढता और समझता है हाशिए भी कहते हैं कुछ कहानी । सीमा स्मृति
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
‘समय की धारा’ गम के साये में समझ पाये, कौन अपने हैं कौन है पराये। पिघली बर्फ,नदी हो गई, मिल सागर से, तूफान में तबदील…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
‘जिन्दगी’ तराजू के एक पलडें में वक्त और जरूरत के बदले जाने पर, मनुष्य का बदल जाना, जीवन सफलता का है चिन्ह वहीं दूसरे पलडें…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
प्यार का अर्थ पाना नहीं, देना प्यार पाने की इच्छा, किसी के करीब होने की चाह, किसी का अपना कहलाने का एहसास किस कद्र दर्द…
रचना पढ़ें : एहसास