सीमा स्मृति का रचना संसार

‘शून्‍य एहसास’

क्‍या फर्क पड़ता है आघात-प्रतिघात से जब दर्द का एहसास शून्‍य पड़ जाता है। यथार्थ तड़पता है— महज शब्‍दों के जाल में किसी रक्‍तहीन दिल…

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शीर्षक रहित रचना

संघर्ष’ अन्‍धकार से लड़ने की परिभाषा से दूर, रोशनी से आवरित उस भीड में, जिसकी चकाचौंध में मिचमिचाने लगी है आंखे, धुंधलाने लगे है रास्‍ते,…

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शीर्षक रहित रचना

‘जिन्‍दगी’ तराजू के एक पलडें में वक्‍त और जरूरत के बदले जा‍ने पर, मनुष्‍य का बदल जाना, जीवन सफलता का है चिन्‍ह वहीं दूसरे पलडें…

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