‘कैसे कहूँ क्यों…….?
गरिमा, आज तुम फिर लेट हो गई, क्या हुआ? क्या बताऊ यार हम वर्किगं लेडीज की बहुत-सी समस्याएँ हैं। पहले तो आज सुबह आँख देर…
रचना पढ़ें : ‘कैसे कहूँ क्यों…….?
गरिमा, आज तुम फिर लेट हो गई, क्या हुआ? क्या बताऊ यार हम वर्किगं लेडीज की बहुत-सी समस्याएँ हैं। पहले तो आज सुबह आँख देर…
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‘एक’ रचना : प्रिया अब तो तुम्हारे मम्मी पापा ने भी तुम्हारे और रमन के प्यार को स्वीकृति दे दी है ,कब कर रहे हो…
रचना पढ़ें : दहेज प्रथा ( एक दौ तीन )
महानगरों में प्रत्येक हाऊसिंग सोसाइटी के आस पास या कुछ दूरी पर प्राय: एक झुगी झोंपडी बस्ती होती है । वरना घरों में काम करने…
रचना पढ़ें : ‘उत्सव’
निशा, क्या बात है, आरती अपना स्कूटर रोक कर क्या कह रही थी ? अरे यार कुछ नहीं बस ये कि वो मुझे घर छोड़…
रचना पढ़ें : ऐसा भी होता है
मीरा अस्पताल में है, मिसेज शर्मा ने कहा । क्या हुआ मीरा को, मिसेज बंसल ने पूछा । मालूम नहीं ! कुछ तो हुआ है…
रचना पढ़ें : सहानुभूति
पत्नी: आपको मालूम है, आज रात नौ बजे टी वी में आंतक एंवम् आंतकवादियों पर विशेष कार्यक्रम दिखाया जाएगा| वही आंतकवादी जिन्होने दिल्ली, अहमदाबाद और…
रचना पढ़ें : परेशानी
तुम भी कहते रहे, हम भी कहते गए रिश्ता हमारे बीच अब कुछ भी नहीं फिर क्यों धड़कने लगता है दिल जब भी तस्वुर में…
रचना पढ़ें : एतबार
तुमने कहा आज अजीब बासीपन, रूकी हुई, जीवनवहीन सी, अब है तुम्हारी जिन्दगी, अजीब अलास सा आता बोलने में तुम से भी अब, हैरान थी…
रचना पढ़ें : खोजती मैं