पवन
बेपरवाह हँसी-सी,ये फिसली ओर ना छोर । कहे पवन छू तन और मन मेरा गगन । पवन बिन इंसान, जल बिन मीन समान। जीवन डोर…
रचना पढ़ें : पवन
बेपरवाह हँसी-सी,ये फिसली ओर ना छोर । कहे पवन छू तन और मन मेरा गगन । पवन बिन इंसान, जल बिन मीन समान। जीवन डोर…
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मैं कोई गुजारा लम्हा नहीं जिसे भुलाने की कोशिश हो मैं इक सच हूँ मैं इक यथार्थ हूँ कोई सपना नहीं जो सुबह हो धुँधला…
रचना पढ़ें : प्रयास
क्यों,कलम हाथ आते ही खो जाते हैं शब्द उन साथियों की तरह जो खो गए मात्र अपनत्व का दे एहसास। क्यों, अभिव्यक्ति की छटपटाहट गुजरे…
रचना पढ़ें : एतबार
बच्चों को छबीस जनवरी दिखाने का प्रोग्राम बनाया गया । भईया ने कार निकाली और हम अपने घर से निकल कर अभी हम आई टी…
रचना पढ़ें : बच्चों के मुख से
कुछ यथार्थ तुम्हारे हैं कुछ यथार्थ मेरे फिर कुछ हैं ---- हमारे यथार्थ में । तुम चलते रेगिस्तान में मेरे कदम सागर की रेत पर…
रचना पढ़ें : फ़ासले
हर क्षण होठों पर सिमटी मुस्कराहट के पीछे क्या आपने देखी है- बनावट की मोटी परत क्या महसूस की है, चुभती कड़वाहट दर्द की एक…
रचना पढ़ें : रहस्य
ऐसा भी होता है निशा, क्या बात है, आरती अपना स्कूटर रोक कर क्या कह रही थी ? अरे यार कुछ नहीं बस ये कि…
रचना पढ़ें : ऐसा भी होता है
जब कभी हिजडों को रेड लाइटो पर भीख मांगते देखती हूँ तो मन द्रवित सा हो जाता है। इन का क्या कसूर है ? कहीं…
रचना पढ़ें : “ प्रश्न”