निज अस्तित्व
परिस्थितियों की कठपुतली आवाज देती है जब कभी निज अस्तित्व की केवल प्रतिघ्वनित होकर रह जाती है वो चारो ओर फैले अहम् के गुबार में…
रचना पढ़ें : निज अस्तित्व
परिस्थितियों की कठपुतली आवाज देती है जब कभी निज अस्तित्व की केवल प्रतिघ्वनित होकर रह जाती है वो चारो ओर फैले अहम् के गुबार में…
रचना पढ़ें : निज अस्तित्व
कब तलग जोड़ते, सहेजते रहोगे वो पैबंद, जो लगाये थे तुमनें मेरी जिन्दगी में प्यार के नाम पर । तुम जीते रहे जिन्दगी, कैद मैं…
रचना पढ़ें : पैबंद
जिन्दगी की किताब के पृष्ठ बदलते रहे उन पर अंकित गहरी काली रेखाएँ कुछ अमिट तनिक सिमट कहती रही कहानी जिन्दगी की। सुना तो था…
रचना पढ़ें : रेखा
जिन्दगी करती है सवाल मुझसे क्या है गम और है क्या खुशी ? अतल सागर में तलाशता है क्यों कोई निधि प्रश्न लहरो से उठते…
रचना पढ़ें : .साथी
अपने संग सहेजती मैं रंग तितली बन। टूटे सपने रूठ गए अपने बने पराये । खोजती पंख छू लेती आसमान मेरी उड़ान । खोये शब्द…
रचना पढ़ें : अधूरे सपने
तपते दिन और बेचैन रातें तन्हा सफर । थमें या बहें पलकों पर रुके अश्क ये कहें । टूटे ये तार हैं जख्मी अख्तियार सोखते…
रचना पढ़ें : इंतजार
है मिला, सब दुख उसका भी है अभिन्न साथी । दुख सुख हैं भाव अनुभूतियॉं अर्थ अनेक । सुख दुख की सलीब पे अटका देखो…
रचना पढ़ें : सुख दुख
अंकुरित सा खिलता कोंपल सा जीवन गीत । पहला प्यार बहार बन आया खिला चमन । मुलाकातो का अंतहीन हो दौर प्यार की डोर ।…
रचना पढ़ें : बदलता रिश्ता