‘ इजाजत’
उन बेबस खामोश निगाहों में उतर आया था शून्य सिमट गया था हर एहसास बिखर कर रह गई थी जिन्दगी बस इक ‘ इजाजत’ की…
रचना पढ़ें : ‘ इजाजत’
उन बेबस खामोश निगाहों में उतर आया था शून्य सिमट गया था हर एहसास बिखर कर रह गई थी जिन्दगी बस इक ‘ इजाजत’ की…
रचना पढ़ें : ‘ इजाजत’
जब भी तेरी तस्वीर,तस्वुर में आती है जिन्दगी पे एतबार की हर कड़ी बिखर जाती है।
रचना पढ़ें : बीता वक्त
स्पर्श केवल, अंघकार की जबान नहीं, यह भाषा है, प्रत्येक जीवन की भट्टी के अंगारो की तरह उकेरा है हर स्पर्श से पूर्व ‘जिन्दगी’ ने…
रचना पढ़ें : ‘मूक’
याद कोई बादल नहीं, जो आये और चली जाये ये तो वो थिर सूरज है जो चमकता है क्षण प्रति क्षण
रचना पढ़ें : याद
जो ‘अर्थ’ जिन्दगी को हम देना चाहते हैं अर्थ स्वंय जो पाती है जिन्दगी इसी कशमकश में अक्सर निकल जाती है जिन्दगी ।
रचना पढ़ें : प्रश्न
तेरे कहने से, मैंनें दिया इक रूप अपने एहसासों को बांध कर तेरी याद मुट्ठी में उड़ा रही हूँ, तेरी दी खुशबु ।
रचना पढ़ें : तेरी याद
ऐस्सी कार के रंगीन शीशों से झांकती दो आंखे, फेर लेती हैं मुहँ चिलचिलाती धूप में, देख अर्धनग्न लड़की को मांगते भीख । छी वट…
रचना पढ़ें : कपड़े
ओस की बूंद-सा अस्तित्व सूर्य किरण में सिमटता चन्द्र किरण से खिलता ये अस्तित्व के धरातल पर ओस-सा अस्तित्व चाहा बहुत ना सूर्य का अपनतत्व…
रचना पढ़ें : ओस सा अस्तित्व