सीमा स्मृति का रचना संसार

रंग

बेइंतहा प्‍यार मिला जिन्‍दगी को उस रंगीन कैन्‍वस की तरह जो रंगहीन हुआ करता है वक्‍त के बेरहम रंग के तले । सीमा स्‍मृति

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याद

नव अंकुरित कली सी , फिंजा में मोहक खुशबु सी, हवा में सिमटी मद मस्‍त मस्‍ती सी, चमकीली धूप सी, शीतल चांदनी सी, ये तेरी…

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‘कहानी’

कल देर रात तक मोहब्‍बत,शबाब, शराब, के जाम छलकें होगें आकेस्‍टरा की धुन पर, थ्रिरकते कदमों, तालियों की र्गगराहट, के बीच नव दम्‍पति नव सूत्र…

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