पहचान
इंसान थे हम, देवता बना वो पूजते रहे बेखबर इस बात से पत्थरों की भी उम्र होती है टूट के बिखर जाने पर पूजने वाले…
रचना पढ़ें : पहचान
इंसान थे हम, देवता बना वो पूजते रहे बेखबर इस बात से पत्थरों की भी उम्र होती है टूट के बिखर जाने पर पूजने वाले…
रचना पढ़ें : पहचान
सुख के पंख होते हैं उडा जा सकता है अंतहीन असीमित इसी भ्रम में दुख की परत दर परत हम ओढते चले जाते हैं ।
रचना पढ़ें : कल्पना
वो कहती हुई चली गई इस दुनिया से कि शब्दबद्ध किया करू मैं अपने उदगारों को प्रतिदिन मैं उदगारों को जीने का प्रयास करती रही…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
बेइंतहा प्यार मिला जिन्दगी को उस रंगीन कैन्वस की तरह जो रंगहीन हुआ करता है वक्त के बेरहम रंग के तले । सीमा स्मृति
रचना पढ़ें : रंग
नव अंकुरित कली सी , फिंजा में मोहक खुशबु सी, हवा में सिमटी मद मस्त मस्ती सी, चमकीली धूप सी, शीतल चांदनी सी, ये तेरी…
रचना पढ़ें : याद
कल देर रात तक मोहब्बत,शबाब, शराब, के जाम छलकें होगें आकेस्टरा की धुन पर, थ्रिरकते कदमों, तालियों की र्गगराहट, के बीच नव दम्पति नव सूत्र…
रचना पढ़ें : ‘कहानी’
उत्तर शोर सुन नींद से जागी आंखे हैरान हो फैल जाया करती थी देख सुबकती मां के शरीर पर पडे नीले हिस्सों और पिता के…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना