जिन्दगी की बातें
बीती ये,उम्र इस इंतजार में मिलेगा प्यार। क्यों प्रतिपल, अनहोनी का डर है उम्र भर। वो मनमीत अधूरे बने गीत कैसा संगीत। खामोशी बनी जहर…
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बीती ये,उम्र इस इंतजार में मिलेगा प्यार। क्यों प्रतिपल, अनहोनी का डर है उम्र भर। वो मनमीत अधूरे बने गीत कैसा संगीत। खामोशी बनी जहर…
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उडेल सको अपनी थकान,मुस्कान चिढ़ और गुस्सा चिल्लाया जा सके झल्लाया जा सके शब्द बोझ न हो जहाँ सोच पर बंधन न हो दर्द को…
रचना पढ़ें : कल्पना या यथार्थ
संवेदना-सी जमी, सर्दी की शामें ढूंढती आंच । खोजते,इक टुकड़ा आशियाना सर्दी का आना। रैन-बसेरा ये ना मेरा,ना तेरा हुआ सवेरा। सर्दी के दिन वो…
रचना पढ़ें : सर्दी
दूरियाँ वक्त की कमी से नहीं शहरों के अंतराल से नहीं एहसास की सरहद में आंकी जाती है। 06.12.2013
रचना पढ़ें : दूरियाँ
पहले---- तेरी खामोशी प्यार के इकरार का शोर मचाती थी अब----- खामोशी में लिपटा तेरा अहं हर बार नया जख्म दिया करता है। 06.12.2013
रचना पढ़ें : बदलाव
कहते हैं मिली हैं सांसे सभी को गिनती भर खेलते खेल इन्हीं सांसो पर सुख :दुख के झूले पर वक्त के हिंडोले पर कितने आये…
रचना पढ़ें : सांसे
नोचे गए रिश्तों भाई –भाई बहन- भाई गुरू- शिष्य जनता –नेता पत्रकार-पत्रकारिता पति-पत्नी हर सामाजिक रिश्ते की लगती है,नुमाइश रोज रात नौ बजे बैडरूम, ड्राइंग…
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