सीमा स्मृति का रचना संसार

जिन्‍दगी की बातें

बीती ये,उम्र इस इंतजार में मिलेगा प्‍यार। क्‍यों प्रतिपल, अनहोनी का डर है उम्र भर। वो मनमीत अधूरे बने गीत कैसा संगीत। खामोशी बनी जहर…

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सर्दी

संवेदना-सी जमी, सर्दी की शामें ढूंढती आंच । खोजते,इक टुकड़ा आशियाना सर्दी का आना। रैन-बसेरा ये ना मेरा,ना तेरा हुआ सवेरा। सर्दी के दिन वो…

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बदलाव

पहले---- तेरी खामोशी प्‍यार के इकरार का शोर मचाती थी अब----- खामोशी में लिपटा तेरा अहं हर बार नया जख्‍म दिया करता है। 06.12.2013

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सांसे

कहते हैं मिली हैं सांसे सभी को गिनती भर खेलते खेल इन्‍हीं सांसो पर सुख :दुख के झूले पर वक्‍त के हिंडोले पर कितने आये…

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लाइव

नोचे गए रिश्‍तों भाई –भाई बहन- भाई गुरू- शिष्‍य जनता –नेता पत्रकार-पत्रकारिता पति-पत्‍नी हर सामाजिक रिश्‍ते की लगती है,नुमाइश रोज रात नौ बजे बैडरूम, ड्राइंग…

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