दूरियाँ वक्त की कमी से नहीं
शहरों के अंतराल से नहीं
एहसास की सरहद में आंकी जाती है।
06.12.2013
शहरों के अंतराल से नहीं
एहसास की सरहद में आंकी जाती है।
06.12.2013

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मुझे इस क्षनिका से एक शेर का मुखड़ा याद आ रहा है॥“जब जरा झुकाई गर्दन देख ली तस्वीरे यार” ॥ यह एहसास ही तो हैं ,जो दूरियों को मिटा या बड़ा देते हैं।