सीमा स्मृति का रचना संसार

बिटिया

माँ ! माई! मम्‍मी बिटिया पुकारती मैं इठलाती । है घर द्वार बजती शहनाई ये रानी आई। तेरे आने से मिली मुझे उड़ान ये पहचान।…

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आंखे

1 खामोश बोलें ये राज हर खोलें बोलती आंखें । 2 नैनों की भाषा है अजब पहेली बूझ सहेली । 3 दर्द से भरी आंसुओं…

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