रिटायरमेंट
पचास पार पनपे ये इंतजार क्या होगा यार। धूप आंगना होगा अब आराम आया विराम । वो घड़ी आई संधर्ष ले बिदाई देगा बधाई। प्रश्न…
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पचास पार पनपे ये इंतजार क्या होगा यार। धूप आंगना होगा अब आराम आया विराम । वो घड़ी आई संधर्ष ले बिदाई देगा बधाई। प्रश्न…
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माँ ! माई! मम्मी बिटिया पुकारती मैं इठलाती । है घर द्वार बजती शहनाई ये रानी आई। तेरे आने से मिली मुझे उड़ान ये पहचान।…
रचना पढ़ें : बिटिया
1 खामोश बोलें ये राज हर खोलें बोलती आंखें । 2 नैनों की भाषा है अजब पहेली बूझ सहेली । 3 दर्द से भरी आंसुओं…
रचना पढ़ें : आंखे
माना तेरी थी मजबूरियाँ क्या किस्मत है टकराना था उनको मेरी ही मोहब्बत के साथ । २७.११.२०१३
रचना पढ़ें : यूँ हुआ
सुना करते थे ओैरों की बेवफाई के किस्से खुद पर जो गुजरी कोई क्या सुनता अपने ही अश्क साथ छोड़ गए। २७.११.२०१३
रचना पढ़ें : अपनापन
कल तेरी आँखों में नींद नहीं थी आज मेरी से है,गायब दो किनारे ही अक्सर,जीते हैं इक ही हकीकत । २७.११.२०१३
रचना पढ़ें : उस पार
क्या हुआ सर, आप आज आफिस के लिए लेट कैसे हो गए ? अरे मैडम क्या बताये, आप तो जानती हो घर में हम सभी…
रचना पढ़ें : इलाज
ये चारो ओर अहम् का गुबार बनावट आधार नोंचे- खसौटे मानवता व प्यार है टूटा एतबार। कैसा माहौल हर ओर घोटाला प्यार दफना डाला कैसे…
रचना पढ़ें : है टूटा एतबार