सीमा स्मृति का रचना संसार

वसन्त

प्रसन्न मन प्रफुल्लित है तन, आया वसन्त। मन के तार बिना साज के राग छाया वसन्त महके फूल तितली चूमे होंठ भँवरे गाएँ। धुन बजती…

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ममता

यशोदा कहो, या पुकारो देवकी इक रूप -सी । है कभी ढाल, कभी तलवार उर विशाल । ममता– छाँव है शीतल चाँदनी भरे है घाव।…

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