सीमा स्मृति का रचना संसार

एहसास

ये एहसास बेकाबू नदी ना हों खामोशी का बांध जरूरी है चाहत है कितनी गहरी नि:शब्‍द एहसास जरूर है । आसान है कहना पर बन्‍धन…

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पल

मांगे जो दो पल सिर्फ अपने लिये हज़ारों बहाने अफ़साने मिले अपनों के भेष में पराये मिले। सीमा स्‍मृति

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माँ

हर सुबह दुओं की पोटली निकालती मेरी माँ चुन दुआएं राहों में देती बिछा कष्‍टाें से लेती बचा । सीमा स्‍मृति

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