सीमा स्मृति का रचना संसार

नव-वर्ष

नव-वर्ष की शुभकामनाओं के लिए एहसास की सुगन्‍ध चाहिए यूं तो नि:शब्‍द भी---- जीवन की बगिया महकती है, उम्‍मीदों के पंछी चहकते हैं, संभावनाओं की…

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ममता

यशोदा कहो, या पुकारो देवकी इक रूप -सी । है कभी ढाल, कभी तलवार उर विशाल । ममता – छाँव है शीतल चाँदनी भरे है…

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सर्दी

सर्दी की शामें संवेदना-सी जमी ढूँढती आँच । खोजते रहे टूटा-सा आशियाना सर्दी का आना। रैन-बसेरा ये ना मेरा,ना तेरा हुआ सवेरा। सर्दी के दिन…

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