सुख : दुख
“राशि हैलो तुझे पता है कि अनिल के फादर की क्रिया आज है। दस दिन बात उसके बेटे की शादी है।” इंदु ने कहा। “नहीं…
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“राशि हैलो तुझे पता है कि अनिल के फादर की क्रिया आज है। दस दिन बात उसके बेटे की शादी है।” इंदु ने कहा। “नहीं…
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सोचती हुँ कभी कभी हादसो से भरी इस दुनिया में फूलों का खिलना सूरज का चमकना पंछियों का चहचहाना बच्चों का मुस्कराना बदलों का गड़गड़ाना…
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जिन्दगी में क्या हुआ अच्छा, हुआ क्या बुरा-घटनाओं से मत आंको वक्त के आईनें में- जिन्दगी सब दिखा देगी।
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क्षणिक मुलाकात भी बन जाती है-उत्सव तारिखों में सिमटे हो उत्सव -ये जरूरी नहीं।
रचना पढ़ें : उत्सव
बड़े घर की परिभाषा बदल गई कमरे हैं बहुत एक ही कमरे सभी करते थे हँसी-ठिठोली, वो निकल गई।
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मुश्किल है समझना खामोशी, जो कहीं हथियार कहीं अहम् की तलवार कहीं बेबसी कहीं प्यार कहीं एतबार कहीं सफलता कहीं असफलता कहीं पुल बन जाती…
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क्या मुसीबत है, ये स्कूल वाले तो सर्दियों की छुटियाँ आगे ही बढ़ाते जा रहे हैं। अब तो इतनी सर्दी भी नहीं है पहले अच्छे…
रचना पढ़ें : धुंध
चेंज-1 “अरे वाह! नीतू इस पिक में तो तुम बहुत सुन्दर लग रही हो, कौन सी जगह है ?” मैंने पिक्स देखते हुए नीतू से…
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