सीमा स्मृति का रचना संसार

प्रश्‍न

सोचती हुँ कभी कभी हादसो से भरी इस दुनिया में फूलों का खिलना सूरज का चमकना पंछियों का चहचहाना बच्‍चों का मुस्‍कराना बदलों का गड़गड़ाना…

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खामोशी

मुश्किल है समझना खामोशी, जो कहीं हथियार कहीं अहम् की तलवार कहीं बेबसी कहीं प्‍यार कहीं एतबार कहीं सफलता कहीं असफलता कहीं पुल बन जाती…

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धुंध

क्‍या मुसीबत है, ये स्‍कूल वाले तो सर्दियों की छुटियाँ आगे ही बढ़ाते जा रहे हैं। अब तो इतनी सर्दी भी नहीं है पहले अच्‍छे…

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चेंज

चेंज-1 “अरे वाह! नीतू इस पिक में तो तुम बहुत सुन्‍दर लग रही हो, कौन सी जगह है ?” मैंने पिक्‍स देखते हुए नीतू से…

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