जीवन के रंग
अपने संग सहेजती मैं रंग तितली बन। टूटे सपने रूठ गए अपने बने पराये । खोजती पंख छू लेती आसमान मेरी उड़ान । खोये शब्द…
रचना पढ़ें : जीवन के रंग
अपने संग सहेजती मैं रंग तितली बन। टूटे सपने रूठ गए अपने बने पराये । खोजती पंख छू लेती आसमान मेरी उड़ान । खोये शब्द…
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1 वोह सांसों के साथ इक लम्हा बह गया, पकड़ो मत। ये क्या कम है,कौन अपना था समझ आ गया। 2 अपने मन की तहें…
रचना पढ़ें : क्षणिका
सीमा स्मृतिवक्त की धार नैया पार या डूबे है, मझधार । पढ़ लो आँखें सुना देंगी कहानी ये अनकही।
रचना पढ़ें : वक्त की धार
1 जिन लम्हों को समझ जिन्दगी, जिया मैंने आज एक अजब पहेली बन जिन्दगी में हैं छाये । 2 बरसों साथ जीने से क्या होता…
रचना पढ़ें : जिन्दगी पहेली
हौंसले बुलन्द हो तो, मंझधार से भी निकल जाती हैं कश्ती वरना तो, किनारों पर भी डूबते देखा है कश्ती को । 23.02.2014
रचना पढ़ें : रास्ता
नौ माह की अवस्था से मेरे दोनों पांव में पोलियो हो गया था। ईश्वर की असीम कृपा एवं माता-पिता के अथक प्रयास से मैं जल्द…
रचना पढ़ें : मेरे ख़्वाबों का सफर
कोख में मरना, जरूरी नहीं है पढ़ना, घर के सभी काम करना, प्यार से घबराना, हर कदम डर जाना, रोना, पर सिसकियाँ ना भरना। दहेज…
रचना पढ़ें : स्त्री : एक परिभाषा
पुराना है विषय नये हैं संदर्भ किसी प्ररेणा के गर्भ में ही पलता होगा प्रेम। आज हर चौराहे मैट्रो,बस,ट्रेन में प्रेम का इजहार मिलता है।…
रचना पढ़ें : प्रेम और प्ररेणा