सीमा स्मृति का रचना संसार

वक्‍त

देखती तुम्‍हारी तस्‍वीर वक्‍त जादू वक्‍त पहेली वक्‍त नशा वक्‍त सजा वक्‍त मेहरबानी वक्‍त निशानी वक्‍त तकदीर वक्‍त तामीर वक्‍त फरीयाद वक्‍त यकीन वक्‍त धोखा…

रचना पढ़ें : वक्‍त

शब्‍द

मैं खोजती शब्‍द.........घर के हर कोने मेंदरवाजों के पीछेबंद संदूकों मेंआंगन में, चौबारे परपरछती परपलंग के नीचेअलमारी के पीछेरोज यहीं तो छिपा करते थेकहां गए…

रचना पढ़ें : शब्‍द

माटी

कान्‍हा ने खाई माई सृष्टि दिखाई लीला रचाई। माटी से बने मिलेंगे माटी ही में क्‍यों हैं अन्‍जान । माटी का मोल जीवन अनमोल योद्धा…

रचना पढ़ें : माटी

वक्‍त

वक़्त के आगे चले ना चतुराई समझो भाई। वक़्त सूरज दिखाता है ये राह ना घबराना । वक़्त के साथी बदलें प्रतिपल देखता चल। वक़्त…

रचना पढ़ें : वक्‍त

पतझर

हुई खामोशी पतझर- सी पीली घूमे अकेली । ख्‍़वाबों के रंग क्‍यों हुए बदरंग बूझो पहेली । वो ठूँठ बना करता इंतजार- आए बहार। वक्‍त…

रचना पढ़ें : पतझर

बचा लो

कैसा लगा दीमक आज समाज में गलने लगा, सड़ने लगा हर रिश्‍ता! संबंध !एहसास गुरू-शिष्‍य पति-पत्‍नी बाप-बेटी भाई-भाई भाई-बहन जनता-नेता चीखते पुकारते करते हैं सवाल…

रचना पढ़ें : बचा लो