- कहीं तस्वीर
कहीं दिल में कैद
यादें दीवानी। - सरकंडों -सी
चुभे,कभी फाहा हो
सोखती दर्द । - याद बादल
नहीं,जो आए जाए
थिर सूरज। - चुने जो फूल
अँजुरी भर लाई
हुए ये शूल। - सर्द शाम की
तन्हाई में सिमटी
खोजें बिछौना। - साँसों -सी चले
ये अंग -संग मग्न
बदले रूप। - ये ठिठकती
सिकुड़ी पपड़ी -सी
है कसकती। - फूल -सी खिली
सिमटी महक -सी
अस्तित्व संग। - मिश्री -सी मीठी
निबौरी सी- कड़वी
अनंत यादें। - शब्दों की सीमा
पाट नहीं पाती ये
यादों की नदी।


सीमा जी, बहुत अच्छा लगा आपको अपने ब्लॉग में देखकर! उत्साहवर्धन का बहुत-बहुत आभार! ऐसे ही मिलते रहिएगा ! 🙂
बहुत सुंदर हाइकु हैं… यादें तो बहुत कुछ समेटे हुए रहतीं हैं.. पूरी ज़िंदगी का ख़ज़ाना .. यादें.. 🙂
~सादर
अनिता ललित