मुलाकात
तुझसे मिलना इक रवायत नहीं किसी उम्र का महकता सुरूर भी नहीं बदली हवाओं में थमा सा कोई नशा भी नहीं । तुझ से मिलना…
रचना पढ़ें : मुलाकात
तुझसे मिलना इक रवायत नहीं किसी उम्र का महकता सुरूर भी नहीं बदली हवाओं में थमा सा कोई नशा भी नहीं । तुझ से मिलना…
रचना पढ़ें : मुलाकात
भोर का शोर यूँ घोलता मिठास झूमे आकाश। भोर का रंग दे उम्मीदों के पंख भरो उड़ान । यूँ गई साँझ सूरज को दे काज…
रचना पढ़ें : भोर
आज फिर बटोरे मैंने, अपनी तन्हाई के टुकड़े जोड़े, दिया इक रूप दी धूप अपने होने की सर्दी में बॉलकनी में पड़े लिहाफ़ सी गंध…
रचना पढ़ें : अपनी गंध
खुशबू चंद सूखे फूलों सी रिश्तों की महक आज भी मेरी जीवन किताब को, रही हैं महका जिन्हें मैंने सहेज लिया था इस डर से…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
आज सुबह रास्ता बदल कर देखा कुछ नये मोड़ लिए हाँ! कुछ भूल हुईं कुछ दर्द मिले कुछ भटकन मिली कुछ नये संघर्ष कुछ नये…
रचना पढ़ें : परिवर्तन
जिन्दगी में कुछ रिश्ते देते हैं मुस्कान! पहचान! विश्वाश! आत्मविश्वास! नये अहसास! तुजरबा! और कुछ देते हैं- हीनता! थकान! करते हैरान-परेशान छिन लेते चैन! करते…
रचना पढ़ें : सवाल
कौन है -वो शांत बर्फ गिरने के बाद घाटी -सी मासूम सर्दी की भोर -सी चंचल पहली बरसात के बाद नदी-सी ख़ामोश झील की तह-सी…
रचना पढ़ें : बूझो
भटकन की रेत पे जलते हैं पाँव कितनी भी तलाशो मिलती नहीं छाँंव । बिना पानी का ये दलदल छीन लेता है चैन हर पल…
रचना पढ़ें : भटकन