मैं खोजती शब्द.........घर के हर कोने मेंदरवाजों के पीछेबंद संदूकों मेंआंगन में, चौबारे परपरछती परपलंग के नीचेअलमारी के पीछेरोज यहीं तो छिपा करते थेकहां गए शब्द.......बंद आंखों से भीखोज लिया करती थी मैं शब्दखामोशी में भी चुन लिया करती थीआज खोजती शब्द.........वक्त खटखटाता रहा दरवाजामैं खोजती रही शब्दतुम्हें मिले तो बतानावो शब्द जो जोड़ते खुद को खुद ही सेवो शब्द जो सुनने को आतुर रहें हम सबवो शब्द जो जोड़ते मन के तारजिन्हें सुन बजे सितारवो शब्द जिन में बनावट नहींवो शब्द जो देते मरहमवो शब्द जो खामोश कहते समझते दिल की बातहां वही सभी शब्दमिले तो बताना । सीमा स्मृति


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