ये हुआ

नमकीन सी हो गई तेरी खामोशी
क्‍या मुझ से हुई  कोई गुस्‍ताखी ।
06.12.2013

1 प्रतिक्रियाएँ

  1. सीमा जी सही कहा आपने, कभी कभी किसी अपने की खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है॥अच्छा प्रयास है.। आप निरंतर लिखा करें और हाँ अपनी साइट को पहले से ज़्यादा सुंदर और वयवस्थित बनाने के लिए बहुत बहुत बधाई।

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