पतझर

  1. हुई खामोशी

    पतझर- सी पीली

    घूमे अकेली ।
  2. ख्‍़वाबों के रंग

    क्‍यों हुए बदरंग

    बूझो पहेली ।
  3. वो ठूँठ बना

    करता इंतजार-

    आए बहार।
  4. वक्‍त सीखता-

    रंगों की पहचान

    बन सुजान।
  5. बदले चाल

    पतझर के बाद

    आये बहार।
  6. बदले रंग

    जीवन व मौसम

    क्‍यों संग- संग।  
  7. टूटे पत्तों- सी

    जिन्‍दगी की कड़ियाँ

    टूटीं- बिखरी।
  8. ये एतबार-

    यूँ मिलेगी बहार

    हो नया प्‍यार ।
  9. वक्‍त- आईना

    कभी न घबराना

    चलते जाना।
  10. अपना साया

    इंद्रधनुष बन

    बदले रंग।

1 प्रतिक्रियाएँ

  1. डॉ. जेन्नी शबनम

    सभी हाइकु बहुत उम्दा है, पतझड़ को बयान कर रहे. यह सबसे ज्यादा पसंद आया…
    अपना साया
    इंद्रधनुष बन
    बदले रंग।
    बधाई.

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