प्रश्‍न

सोचती हुँ कभी कभी
हादसो से भरी इस दुनिया में 
फूलों का खिलना 
सूरज का चमकना
पंछियों का चहचहाना
बच्‍चों का मुस्‍कराना
बदलों का गड़गड़ाना
नदियों का छन-छनाना
ना होती ये सुरलहरियों
तो जिन्‍दगी  कैसी होती?

2 प्रतिक्रियाएँ

  1. Seema ji……

    Pehle toh apke wallpaper ne hamare zehan ko sparsh kiya. Yeh pushp bahut hi khoosurat hai, sundar hai apke lekh ki tarah.
    Apka prashna zindagi mein basi komalta darshata hai. Ek manav ka astitva inhi suron ke aaine mein jhalakta hai…
    Iss sundarta ko baatne ka shukriya.

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